Mop smile roti bank gorakhpur

बेटीयाँ तोड़ेंगी बेडियाँ

सफर में सफरिंग

आज लोग हर तरह की बातें करते मान -सम्मान देश उनत्ति राजनीति समाज सेवा..लेकिन आज भी महिलाओं के अंदर ये धारणा है की लोग क्या कहेंगे..अगर हम कहे की हमें शौचालय जाना तो तो हम खुल के कह नहीं पाएँगे क्योंकि सब की नज़र उस महिला पे रहेंगी और वो शर्म के मारे बोलेगी नहीं

सफ़र में 5 घण्टे के रास्ते में सरकारी या प्राइवेट बस 2 बार रुकेगी किसी भी ढ़ाबे के किनारे चाहे वो ढाबा हाईवे पे हो या सुनसान रोड पे..

और कहते उतर जाओ ...
और कर लो.....

उतरने के बाद ना सुलभ् शौचालय ना कोई जगह। अगर गलती से हो भी तो बांस की लकड़ियों का ..जिसमे दरवाज़े टूटे और गन्दी दुर्गंध तत्काल मिर्गी का अहसास दे रही होती है।
साथ ही कुछ बजबजाते कीड़े
ना पानी ना जनानी
और शौचालय है तो कीमत 5 रूपया...
और वो भी पान कचरता हुआ एक नशेड़ी गेट पे ही 10 रूपये के लिए आपको निहारेगा।

और ना रहे तो कोई कहा जाये आगे भी बस..पीछे भी बस लोगों की भरमार ..अब हम ये बात किससेे कहे..
लड़कियां डर के वजह से पानी नहीं पीतीं क्योंकि उन्हें बार- बार बाथरूम जाना पड़ता है। और हर बार शर्मशार होना पड़ता है।।
100में 70% लड़कियों से पूछेंगे तो उनका जवाब यही होगा की मैं नहीं पीती..चाहे इसके वज़ह से उन्हें कितनी गम्भीर समस्याए क्यों ना आये किड्नी में खराबी जैसे इन्फेक्शन लेकिन वो आदत नहीं बदलेंगी ...क्योंकि वो इज्जत करती।।
मेरा अनुरोध है की हम ऐशे समाज का निर्माण करे जहां हम खुल के रह सके एक स्वस्थ जीवन और आत्मविस्वास के साथ..जहां हमें शौचालय जैसे जगह और आत्मसम्मान की मांग ना करनी पड़े..
अपनी इज्जत अपने हाथ
तब होगा भारत का विकास....

नोट-- स्माइल रोटी बैंक के अभियान में लखनऊ यात्रा के दौरान मिला एक सामाजिक दर्द।।

Avatar Ashvanee
from India, 4 tahun yang lalu

Periode Proyek

Started On
Monday, May 30, 2016
Ended On
Monday, May 30, 2016

Jumlah peserta

35

Lamanya pelayanan

105

Topics

Youth Programme

SDG

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